नागपुर की बल्ले-बल्ले
लगता है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को नागपुर से कुछ ज्यादा ही प्यार हैं, इसीलिए देश में होने वाली हर सीरीज़ का एक मैच नागपुर में जरूर होता है, कभी-कभी तो एक ही सीरीज़ के दो-दो मैच नागपुर में ही आयोजित करवा दिए जाते है। भारत जैसे इतने विशाल देश में जहाँ कुछ और बड़े और अच्छे क्रिकेट स्टेडियम भी है, जिनमे बंगलोर का चिन्नास्वामी स्टेडियम, मुंबई का ब्रेबौन स्टेडियम, कोलकाता का इडेन गार्डेन, अहमदाबाद का सरदार पटेल मोटेरा स्टेडियम, हैदराबाद का राजीव गाँधी स्टेडियम, मोहाली का पीसीए स्टेडियम और चेन्नई का चेपक स्टेडियम शामिल है। जहाँ पर कई अच्छे और यादगार मैचों का आयोजन हो चुका है, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड इनमे से कुछ एसो के साथ अपनी सौतेलेबाजी होने के चलते इन शहर के लोगो को इन मैचों से महरूम रखता है। इसके सबके बावजूद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने एक बार फिर २०१० फ़रवरी में साउथ अफ्रीका के खिलाफ होने वाली सीरीज़ के टेस्ट मैच की मेजबानी नागपुर को दे दी ।
२००९ के इस सत्र में नागपुर में कुल ३ मैच खेले गए है, जिनमे एकदिवसीय और १ ट्वेंटी-ट्वेंटी है। इन तीनों मैचों से नागपुर एसो का भले ही फायदा हुआ हो, लेकिन नागपुर का यह मैदान टीम इण्डिया के लिए लकी नहीं रहा है, भारतीय टीम ने इस सत्र में नागपुर में अपने तीन मैचों में से सिर्फ एक ही मैच में जीत हासिल की है।
विदर्भ क्रिकेट एसो द्वारा नागपुर में बनाया गया जमथा क्रिकेट स्टेडियम भले ही बहुत अच्छी सुविधाओं से लेस है, लेकिन इसका यह मतलब न हो की भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड नागपुर की खूबसूरती दिखाने के चक्कर में देश के अन्य स्टेडियम को ऐसा नजर अंदाज़ न करे की उनकी हालत बदतर हो जाये।
Wednesday, December 30, 2009
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