Wednesday, December 30, 2009

भारतीय क्रिकेट बोर्ड का नागपुर प्रेम

नागपुर की बल्ले-बल्ले
लगता है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को नागपुर से कुछ ज्यादा ही प्यार हैं, इसीलिए देश में होने वाली हर सीरीज़ का एक मैच नागपुर में जरूर होता है, कभी-कभी तो एक ही सीरीज़ के दो-दो मैच नागपुर में ही आयोजित करवा दिए जाते है। भारत जैसे इतने विशाल देश में जहाँ कुछ और बड़े और अच्छे क्रिकेट स्टेडियम भी है, जिनमे बंगलोर का चिन्नास्वामी स्टेडियम, मुंबई का ब्रेबौन स्टेडियम, कोलकाता का इडेन गार्डेन, अहमदाबाद का सरदार पटेल मोटेरा स्टेडियम, हैदराबाद का राजीव गाँधी स्टेडियम, मोहाली का पीसीए स्टेडियम और चेन्नई का चेपक स्टेडियम शामिल है। जहाँ पर कई अच्छे और यादगार मैचों का आयोजन हो चुका है, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड इनमे से कुछ एसो के साथ अपनी सौतेलेबाजी होने के चलते इन शहर के लोगो को इन मैचों से महरूम रखता है। इसके सबके बावजूद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने एक बार फिर २०१० फ़रवरी में साउथ अफ्रीका के खिलाफ होने वाली सीरीज़ के टेस्ट मैच की मेजबानी नागपुर को दे दी ।
२००९ के इस सत्र में नागपुर में कुल ३ मैच खेले गए है, जिनमे एकदिवसीय और १ ट्वेंटी-ट्वेंटी है। इन तीनों मैचों से नागपुर एसो का भले ही फायदा हुआ हो, लेकिन नागपुर का यह मैदान टीम इण्डिया के लिए लकी नहीं रहा है, भारतीय टीम ने इस सत्र में नागपुर में अपने तीन मैचों में से सिर्फ एक ही मैच में जीत हासिल की है।

विदर्भ क्रिकेट एसो द्वारा नागपुर में बनाया गया जमथा क्रिकेट स्टेडियम भले ही बहुत अच्छी सुविधाओं से लेस है, लेकिन इसका यह मतलब न हो की भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड नागपुर की खूबसूरती दिखाने के चक्कर में देश के अन्य स्टेडियम को ऐसा नजर अंदाज़ न करे की उनकी हालत बदतर हो जाये।

Tuesday, December 29, 2009

पिच ने किया देश को शर्मसार

पिच ने किया शर्मसार
जिस समय भारत श्रीलंका के ख़िलाफ सीरीज़ मैं ३-१ से आगे था और उम्मीद थी की टीम इण्डिया ४-१ से सीरीज़ जीतकर देश वासियों को नए साल का तोहफा देगी। उस समय देल्ही की पिच ने एक ऐसा काम कर किया की देशवासियों को तोहफे के बजाए शर्मिंदा होना पड़ा। जी हाँ, देल्ही के जिस फ़िरोज़ शाह कोटला में मैच होना था, वहां की पिच ने ऐसा खेल दिखाया की विरोधी टीम के खिलाडियों ने हाथ उठा लिए और खेलने से साफ़ इंकार दिया और जिसके बाद मैच को रद्द करना पड़ा ।
यह घटना ठीक १२ साल बाद हुई, इससे पहले 1997 में इंदौर में भी ख़राब पिच को लेकर मैच रद्द कर दिया गया था, इतेफाक से उस बार भी सामने वाली टीम श्रीलंका की ही थी। लेकिन उस समय इसकी इतनी चर्चा नहीं हुई थी, क्यूंकि न ही उस समय इतना प्रभावशाली मीडिया था और न ही क्रिकेट का व्यवसायीकरण हुआ था। लेकिन आज जब भारतीय क्रिकेट में इतना पैसा आ गया उसके बावजूद क्रिकेट की बेसिक सुविधाओं पर कोई जोर नहीं दिया जा रहा है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड, जो की दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है उसे इस पिच काण्ड से सबक लेकर कुछ ठोस कदम जरूर उठाने होंगे, क्यूंकि यह किसी छोटे शहर में हुई आम घटना नहीं है, बल्कि यह देश की राजधानी देल्ही में हुआ एक बड़ा मामला है, इससे दुनिया भर में देल्ही के साथ-साथ देश की छवि को काफी ज्यादा नुकसान हुआ है ।

वही इस काण्ड के बाद २०११ में भारत में होने वाले वर्ल्ड कप पर भी इसका बुरा असर पड़ता दिख रहा है और अगर देल्ही के फ़िरोज़ शाह कोटला पर कोई ठोस कारवाई होती है तो देश की राजधानी के हाथों से वर्ल्ड कप के मैच का आयोजन फिसल सकता है, जो की देल्ही के लिए काफी शर्मिंदगी की बात होगी और इसका जिम्मेदार और कोई नहीं सिर्फ देल्ही क्रिकेट एसो और इसके अधिकारी होंगे.