Monday, January 4, 2010
दिल्ली के कोटला पिच कांड से सबक लेता दिख रहा है भारतीय बोर्ड..
साल २०१० के पहले दौरे की तयारियां शुरू हो गयी है, लेकिन इस बार भारतीय क्रिकेट बोर्ड बहुत फूक-फूक के कदम रख रहा है। जिसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है की बोर्ड की टूर समिति ने हाल में हुए श्रीलंका दौरे के अंतिम मैच में हुए दिल्ली के कोटला पिच विवाद को धयान में रखते हुए मैचों के आयोजन स्थलों का चुनाव किया है।
२०१० में भारत में खेले जाने वाली भारत और साउथ अफ्रीका सीरीज़ का कार्यक्रम तैयार हो गया है। साउथ अफ्रीका इस दौरे पर २ टेस्ट मैच और ३ एकदिवसीय मैच खेलेगा। पहले इस दौरे में सिर्फ ५ एक दिवसीय मैच खेले जाने थे, लेकिन कुछ पूर्व और अनुभवी खिलाडियों की वकालत करने पर भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड ने साउथ अफ्रीकी बोर्ड से बात करके इस दौरे में २ टेस्ट मैच भी जुड़वाँ लिए। लेकिन इसक एवज में भारतीय बोर्ड को २ एकदिवसीय मैचो का बलिदान भी देना पड़ा। बोर्ड ने यह बलिदान ऐसे ही नहीं दिया इसके पीछे मकसद है की टीम इंडिया के सिर पर टेस्ट मैचों में नंबर १ का ताज बना रहे, क्यूंकि सीनियर खिलाडियों के साथ-साथ बोर्ड को भी यह मालूम था की टीम इंडिया को २०१० में सिर्फ २ टेस्ट मैच खेलने है वो भी बंगलादेश के खिलाफ और सिर्फ इन २ मैचों के आधार पर टीम इण्डिया का आईसीसी की टेस्ट रंकिंग्स में नंबर १ बना रहना काफी मुश्किल होगा। इसीलिए बोर्ड ने साल के शुरू में हो रहे साउथ अफ्रीका टूर में ही २ टेस्ट मैचों का आयोजन करवाना फायदेमंद समझा।
करीब दो साल बाद भारत दौरे पर आ रही साउथ अफ्रीका टीम ३१ जनवरी को भारत पहुचेगी। २८ दिनों के इस दौरे में पहले २ टेस्ट और फिर ३ एक दिवसीय मैच खेले जायेंगे। टेस्ट मैचों का आयोजन नागपुर के जमथा और कोलकाता के इडेन गार्डेन में होगा, जबकि एक दिवसीय मैच जयपुर के सवाई मान सिंह स्टेडियम में, कानपुर के ग्रीन पार्क और अहमदाबाद के मोटेरा में खेले जायेंगे। नागपुर के जमथा का जहाँ यह पहला टेस्ट मैच होगा वहीँ, कोलकाता में २ साल बाद टेस्ट मैच खेला जायेगा। बोर्ड की सौतेले व्यवहार के कारण कोलकाता के खेल प्रेमी पिछले २ सालों से टेस्ट मैच के आनंद से महरूम रहे है, इडेन गार्डेन में आखरी टेस्ट मैच भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया था जो की बराबर रहा था।
वहीँ भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने दिल्ली के फ़िरोज़ शाह कोटला के पिच कांड से सबक लेते हुए इस बार सावधानी पूर्वक मैच के आयोजन सेंटरों का चुनाव किया है। इस बात का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है, की साउथ अफ्रीका दौरे पर होने वाले २ टेस्ट मैचों में से १ का आयोजन दिल्ली में होना था, जबकि ३ एकदिवसीय मैचों की सीरीज़ का एक मैच गोवा में खेला जाना निर्धारित था, लेकिन बोर्ड की टूर समिति ने अंतिम समय में अपना निर्णय बदल दिया और मेजबानी दूसरे सेंटरों को सौप दी। इससे साफ़ पता लगता है की कोटला कांड ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को आखें खोल दी है और बोर्ड मैचों के सफल आयोजन में कोई कूर कसार नहीं रहने देना चाहता है। इसीलिए बोर्ड ने नियम बना दिया है की सभी एसो को मैचों के आयोजन कराने से ३ महीने पहले ही पिच को तैयार करना होगा।
Wednesday, December 30, 2009
भारतीय क्रिकेट बोर्ड का नागपुर प्रेम
नागपुर की बल्ले-बल्ले
लगता है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को नागपुर से कुछ ज्यादा ही प्यार हैं, इसीलिए देश में होने वाली हर सीरीज़ का एक मैच नागपुर में जरूर होता है, कभी-कभी तो एक ही सीरीज़ के दो-दो मैच नागपुर में ही आयोजित करवा दिए जाते है। भारत जैसे इतने विशाल देश में जहाँ कुछ और बड़े और अच्छे क्रिकेट स्टेडियम भी है, जिनमे बंगलोर का चिन्नास्वामी स्टेडियम, मुंबई का ब्रेबौन स्टेडियम, कोलकाता का इडेन गार्डेन, अहमदाबाद का सरदार पटेल मोटेरा स्टेडियम, हैदराबाद का राजीव गाँधी स्टेडियम, मोहाली का पीसीए स्टेडियम और चेन्नई का चेपक स्टेडियम शामिल है। जहाँ पर कई अच्छे और यादगार मैचों का आयोजन हो चुका है, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड इनमे से कुछ एसो के साथ अपनी सौतेलेबाजी होने के चलते इन शहर के लोगो को इन मैचों से महरूम रखता है। इसके सबके बावजूद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने एक बार फिर २०१० फ़रवरी में साउथ अफ्रीका के खिलाफ होने वाली सीरीज़ के टेस्ट मैच की मेजबानी नागपुर को दे दी ।
२००९ के इस सत्र में नागपुर में कुल ३ मैच खेले गए है, जिनमे एकदिवसीय और १ ट्वेंटी-ट्वेंटी है। इन तीनों मैचों से नागपुर एसो का भले ही फायदा हुआ हो, लेकिन नागपुर का यह मैदान टीम इण्डिया के लिए लकी नहीं रहा है, भारतीय टीम ने इस सत्र में नागपुर में अपने तीन मैचों में से सिर्फ एक ही मैच में जीत हासिल की है।
विदर्भ क्रिकेट एसो द्वारा नागपुर में बनाया गया जमथा क्रिकेट स्टेडियम भले ही बहुत अच्छी सुविधाओं से लेस है, लेकिन इसका यह मतलब न हो की भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड नागपुर की खूबसूरती दिखाने के चक्कर में देश के अन्य स्टेडियम को ऐसा नजर अंदाज़ न करे की उनकी हालत बदतर हो जाये।
लगता है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को नागपुर से कुछ ज्यादा ही प्यार हैं, इसीलिए देश में होने वाली हर सीरीज़ का एक मैच नागपुर में जरूर होता है, कभी-कभी तो एक ही सीरीज़ के दो-दो मैच नागपुर में ही आयोजित करवा दिए जाते है। भारत जैसे इतने विशाल देश में जहाँ कुछ और बड़े और अच्छे क्रिकेट स्टेडियम भी है, जिनमे बंगलोर का चिन्नास्वामी स्टेडियम, मुंबई का ब्रेबौन स्टेडियम, कोलकाता का इडेन गार्डेन, अहमदाबाद का सरदार पटेल मोटेरा स्टेडियम, हैदराबाद का राजीव गाँधी स्टेडियम, मोहाली का पीसीए स्टेडियम और चेन्नई का चेपक स्टेडियम शामिल है। जहाँ पर कई अच्छे और यादगार मैचों का आयोजन हो चुका है, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड इनमे से कुछ एसो के साथ अपनी सौतेलेबाजी होने के चलते इन शहर के लोगो को इन मैचों से महरूम रखता है। इसके सबके बावजूद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने एक बार फिर २०१० फ़रवरी में साउथ अफ्रीका के खिलाफ होने वाली सीरीज़ के टेस्ट मैच की मेजबानी नागपुर को दे दी ।
२००९ के इस सत्र में नागपुर में कुल ३ मैच खेले गए है, जिनमे एकदिवसीय और १ ट्वेंटी-ट्वेंटी है। इन तीनों मैचों से नागपुर एसो का भले ही फायदा हुआ हो, लेकिन नागपुर का यह मैदान टीम इण्डिया के लिए लकी नहीं रहा है, भारतीय टीम ने इस सत्र में नागपुर में अपने तीन मैचों में से सिर्फ एक ही मैच में जीत हासिल की है।
विदर्भ क्रिकेट एसो द्वारा नागपुर में बनाया गया जमथा क्रिकेट स्टेडियम भले ही बहुत अच्छी सुविधाओं से लेस है, लेकिन इसका यह मतलब न हो की भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड नागपुर की खूबसूरती दिखाने के चक्कर में देश के अन्य स्टेडियम को ऐसा नजर अंदाज़ न करे की उनकी हालत बदतर हो जाये।
Tuesday, December 29, 2009
पिच ने किया देश को शर्मसार
पिच ने किया शर्मसार
जिस समय भारत श्रीलंका के ख़िलाफ सीरीज़ मैं ३-१ से आगे था और उम्मीद थी की टीम इण्डिया ४-१ से सीरीज़ जीतकर देश वासियों को नए साल का तोहफा देगी। उस समय देल्ही की पिच ने एक ऐसा काम कर किया की देशवासियों को तोहफे के बजाए शर्मिंदा होना पड़ा। जी हाँ, देल्ही के जिस फ़िरोज़ शाह कोटला में मैच होना था, वहां की पिच ने ऐसा खेल दिखाया की विरोधी टीम के खिलाडियों ने हाथ उठा लिए और खेलने से साफ़ इंकार दिया और जिसके बाद मैच को रद्द करना पड़ा ।
यह घटना ठीक १२ साल बाद हुई, इससे पहले 1997 में इंदौर में भी ख़राब पिच को लेकर मैच रद्द कर दिया गया था, इतेफाक से उस बार भी सामने वाली टीम श्रीलंका की ही थी। लेकिन उस समय इसकी इतनी चर्चा नहीं हुई थी, क्यूंकि न ही उस समय इतना प्रभावशाली मीडिया था और न ही क्रिकेट का व्यवसायीकरण हुआ था। लेकिन आज जब भारतीय क्रिकेट में इतना पैसा आ गया उसके बावजूद क्रिकेट की बेसिक सुविधाओं पर कोई जोर नहीं दिया जा रहा है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड, जो की दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है उसे इस पिच काण्ड से सबक लेकर कुछ ठोस कदम जरूर उठाने होंगे, क्यूंकि यह किसी छोटे शहर में हुई आम घटना नहीं है, बल्कि यह देश की राजधानी देल्ही में हुआ एक बड़ा मामला है, इससे दुनिया भर में देल्ही के साथ-साथ देश की छवि को काफी ज्यादा नुकसान हुआ है ।
वही इस काण्ड के बाद २०११ में भारत में होने वाले वर्ल्ड कप पर भी इसका बुरा असर पड़ता दिख रहा है और अगर देल्ही के फ़िरोज़ शाह कोटला पर कोई ठोस कारवाई होती है तो देश की राजधानी के हाथों से वर्ल्ड कप के मैच का आयोजन फिसल सकता है, जो की देल्ही के लिए काफी शर्मिंदगी की बात होगी और इसका जिम्मेदार और कोई नहीं सिर्फ देल्ही क्रिकेट एसो और इसके अधिकारी होंगे.
जिस समय भारत श्रीलंका के ख़िलाफ सीरीज़ मैं ३-१ से आगे था और उम्मीद थी की टीम इण्डिया ४-१ से सीरीज़ जीतकर देश वासियों को नए साल का तोहफा देगी। उस समय देल्ही की पिच ने एक ऐसा काम कर किया की देशवासियों को तोहफे के बजाए शर्मिंदा होना पड़ा। जी हाँ, देल्ही के जिस फ़िरोज़ शाह कोटला में मैच होना था, वहां की पिच ने ऐसा खेल दिखाया की विरोधी टीम के खिलाडियों ने हाथ उठा लिए और खेलने से साफ़ इंकार दिया और जिसके बाद मैच को रद्द करना पड़ा ।
यह घटना ठीक १२ साल बाद हुई, इससे पहले 1997 में इंदौर में भी ख़राब पिच को लेकर मैच रद्द कर दिया गया था, इतेफाक से उस बार भी सामने वाली टीम श्रीलंका की ही थी। लेकिन उस समय इसकी इतनी चर्चा नहीं हुई थी, क्यूंकि न ही उस समय इतना प्रभावशाली मीडिया था और न ही क्रिकेट का व्यवसायीकरण हुआ था। लेकिन आज जब भारतीय क्रिकेट में इतना पैसा आ गया उसके बावजूद क्रिकेट की बेसिक सुविधाओं पर कोई जोर नहीं दिया जा रहा है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड, जो की दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है उसे इस पिच काण्ड से सबक लेकर कुछ ठोस कदम जरूर उठाने होंगे, क्यूंकि यह किसी छोटे शहर में हुई आम घटना नहीं है, बल्कि यह देश की राजधानी देल्ही में हुआ एक बड़ा मामला है, इससे दुनिया भर में देल्ही के साथ-साथ देश की छवि को काफी ज्यादा नुकसान हुआ है ।
वही इस काण्ड के बाद २०११ में भारत में होने वाले वर्ल्ड कप पर भी इसका बुरा असर पड़ता दिख रहा है और अगर देल्ही के फ़िरोज़ शाह कोटला पर कोई ठोस कारवाई होती है तो देश की राजधानी के हाथों से वर्ल्ड कप के मैच का आयोजन फिसल सकता है, जो की देल्ही के लिए काफी शर्मिंदगी की बात होगी और इसका जिम्मेदार और कोई नहीं सिर्फ देल्ही क्रिकेट एसो और इसके अधिकारी होंगे.
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